लाशों का म्यूजियम है इटली का यह कब्रिस्तान, जान कर हो जाएंगे हैरान | Troopel.com

दुनिया का इतिहास अपने अंदर कई अद्भुत और रोचक परम्पराएं समाहित किए हुए है। सभी देशों की सदियों पुरानी मान्यताएं और परम्पराएं अपने आप में अनूठी और विचित्र हैं। इटली दुनिया के प्राचीनतम देशों में से एक है। यही वजह है कि प्राचीन इटली निवासियों की परम्पराएं तत्कालीन समाज में व्याप्त रहस्यमयी और अविश्वसनीय मान्यताओं का बखान करती हैं।

इटली के सिसली नगर में कापूचिन कैटाकॉम्ब नाम का एक ऐसा कब्रिस्तान है, जहाँ प्राचीन समय में शवों को दफनाया नहीं जाता था, बल्कि उनकी ममी बनाकर दीवारों पर लटका दिया जाता था। उन शवों पर रासायनिक पदार्थ लगा दिए जाते थे, जिसके कारण ना तो वे खराब होते थे और ना ही उनमे से दुर्गंध आती थी। ऐसा कहा जाता है कि यह सिलसिला सन् 1599 में ब्रदर सिल्वेस्ट्रो ऑफ गूबियो की ममी बनाने के साथ शुरू हुआ था। 

इस कब्रिस्तान की कहानी जितनी डरावनी है, उतना ही यहाँ पहुंचने का रास्ता भी भयानक है। कमजोर दिल का व्यक्ति अपने जीवन में इस कब्रिस्तान में जाने की कल्पना भी नहीं कर सकता। कब्रिस्तान तक पहुंचने के लिए एक अंधेरे रास्ते में बनी सीढ़ियों से गुजरना पड़ता है, जो बेहद डरावनी हैं। कब्रिस्तान के दरवाजे पर साफ तौर पर लिखा गया है कि “यहाँ आने वाले, अपनी सभी उम्मीदें छोड़ दें” जिसे पढ़कर कमजोर दिल का व्यक्ति निश्चित ही वापिस लौट जाने का विचार बना लेता है। 

कब्रिस्तान के भीतर प्राचीन परम्परा के चलते सैकड़ों शरीर दीवारों पर टंगे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि इस कब्रिस्तान में शवों को उनके सामाजिक दर्जे और स्थान के आधार पर स्थान दिया जाता था, जो तत्कालीन समाज में व्याप्त सामाजिक और जातिगत भेदभावों की हकीकत का बखान करता है। कहा जाता है कि इनमें सबसे पहला स्थान इस कब्रिस्तान की स्थापना करने वाले संतों को दिया गया है। संतों के बाद पुरुषों की श्रेणी रखी गई है। इसके बाद महिलाओं को स्थान दिया गया है, जिसमें कुंवारी कन्याओं की पहचान के लिए उनके सिर पर धातु से बना बैंड पहनाया गया है। यहाँ प्रोफेसर्स, डॉक्टर्स और सैनिकों का स्थान भी अलग है। हालांकि 1871 में ब्रदर रिकाडरे ने यह परंपरा बंद करवा दी थी। लेकिन इसके बावजूद वर्ष 1920 में रोसालिआ लॉबाडरे नामक एक बच्ची के शव की ममी बनाई गई। बच्ची के शव को बचाए रखने के लिए इस पर कौन सा केमिकल लगाया गया, यह बात अभी तक कोई नहीं जान सका। इस बच्ची को देखकर कोई यह नहीं कह सकता कि यह जीवित नहीं है। इसलिए इस ममी का नाम स्लीपिंग ब्यूटी रख दिया गया है। 

कोरोना काल के चलते देश दुनिया के हाल बद से बदतर होते जा रहे हैं, जिसमें सबसे बड़ा संकट तमाम श्मशानों तथा कब्रिस्तानों तथा इनके आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सर मंडरा रहा है।

हजारों की तादाद में जलती चिताओं से निकलता धुआँ और बड़ी संख्या में दफन होते कोरोना संक्रमित वातावरण में लगातार खतरे का संकेत दे रहे हैं। यदि आपके क्षेत्र में भी समान समस्या से स्थिति बेहाल है, तो Troopel.com को अवगत कराएं।  

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